Sunday, September 29, 2024

Horror story: उसका आखिरी मैसेज | Her Last Message !!

उसका आखिरी मैसेज ! | Her Last Message!
Horror story | डरावनी कहानी | Ghost Story | भूत प्रेत की कहानी 

मनीष कुमार शर्मा उर्फ मनीष शर्मा उन दिनों बिहार के भागलपुर जिले के छोटे कस्बे में स्थित एक राष्ट्रीय बैंक(National Bank)की शाखा में क्लर्क के रूप में बहाल हुआ था ।
नई नई बैंक की नौकरी (Bank Job)। नई नई उमर । मनीष को जैसे पंख लग गए हों । वह हवा में उड़ रहा था । भागलपुर जिले में यह उसकी पहली पोस्टिंग थी। बैंक के पुराने प्यून की मदद से उसे अपने बैंक के पास ही के एक मुहल्ले में , सिंगल बेड का कमरा मिल गया 

मकान मालिक जोगेद्र बाबू मनीष के ही कास्ट के थे इसलिए मनीष को रूम के साथ साथ कई और सुविधाएं मिल गई । जोगेंद्र बाबू की दो लड़कियां और एक लड़का था जो अपनी दोनों बहनों में सबसे छोटा और घर का दुलारा था ।

अब इस कहानी को विस्तार ना देते हुए अपुन सीधे मूल मुद्दे पर आते हैं । मुद्दा यह था कि मनीष को जोगेंद्र बाबू की बड़ी बेटी गौरी से प्यार हो गया। इस प्यार की पहल मनीष ने की थी । उसने ही गौरी के दिल में मुहब्बत का रंग भरा था वर्ना गौरी तो एकदम सीधी साधी मासूम लड़की थी । बदकिस्मती से उसकी अभी तक शादी नहीं ठीक हो पाई थी ।

गौरी मनीष के प्यार में इस कदर पगला गई थी। कि वह कोई भी मौका देख मनीष के कमरे में घुस जाती । फिर देर तक प्यार का सिलसिला चलता । उन दोनों का प्यार अब सिर्फ मन की भावनाओं का ही प्रेम नहीं रह गया था बल्कि हद से बेहद का जिस्मानी संपर्क का रूप ले चुका था। 

बैंक की नौकरी के तकरीबन एक महीने बाद मनीष को सूचना मिली की उसका ट्रांसफर इसी शहर के एक दूसरे ब्रांच में हो गया है ! बैंक की यह शाखा भागलपुर के मेन टाउन के बिजी बाजार एरिया में स्थित थी ।

मनीष कुमार शर्मा अर्थात मनीष बहुत खुश हुआ मगर गौरी उदास हो गई । “ हाय राम अब कैसे मिलेंगे ? अकेले तुम्हारे बगैर कैसे जिएंगे ?! “मत जाइए प्लीज !” ठीक इसी तरह की गुजारिश और प्यार का इसरार । फिर मनीष उसे समझता कि “ सब कुछ ठीक हो जायेगा । “ वहां एक बार अच्छी तरह सेटल हो जाऊं तो तुम्हे भी अपने पास बुला लूंगा ! “हम शादी कर लेंगे !” आदि आदि ।


फिर मनीष वहां चला गया । उसके जाने के बाद ही गौरी का प्रेम सूत्र एक झटके में टूट कर बिखर गया ।कई दिन बीते , एक महीने से ऊपर गुजर गया लेकिन मनीष ने उसकी सुध न ली। फ़ोन(Mobile Phone)करो तो उठता नहीं था । मैसेज करो तो उसका जवाब नहीं देता। क्या करे गौरी ? किसकी मदद ले ? क्या वह किसी बहाने से उसके बैंक जाए और उससे मुलाकात करे? लेकिन कौन सा बहाना ? कौन सा काम ? कॉलेज छूटे हुए एक अरसा हो गया था। और बाबूजी के सख्त , गुस्सैल मिजाज से वह वाकिफ थी । 

इधर मनीष कुमार शर्मा यानी मनीष शर्मा अपने काम में मशगूल रहता । सभी ऊपरी अधिकारी और बैंक के अन्य स्टाफ उसके काम की दक्षता से खुश थे । उसकी शादी की तैयारियां भी हो रही थी । मनीष एक अलग सुनहरे ख्वाब में डूबने लगा था कि एक दिन उसके फोन के मैसेज बॉक्स(Message Box)का नोटिफिकेशन बेल बजा । मनीष ने उस पर ध्यान नहीं दिया । कैश काउंटर पर नियुक्त बैंक स्टाफ को ऐसी छोटी बातों पर ध्यान देने की फुरसत कहां ?!

देर शाम को जब वह अपने फ्लैट में लौटा और नहा धो फ्रेश होकर टीवी(Telivision )का रिमोट ऑन किया तो उसका ध्यान अपनी फोन पर आए मैसेज पर गया । “ अरे यह तो गौरी का मैसेज है !” “अच्छा तो उसे मेरा फोन नंबर अभी तक याद है? “

मैसेज में लिखा था ….
“मनीष यह मेरा तुम्हे आखरी मैसेज है । इसके बाद मैं तुमसे बहुत दूर चली जाऊंगी । “
“ दुनिया से दूर ! इतनी दूर जहां से कोई नहीं लौटता ! ! “ प्लीज एक बार मिल लो ! “

दुनिया से दूर ? ! यह गौरी पागल हो गई है क्या ? ऐसा शायराना लहजा !! “

मनीष चाहता तो गौरी के इस मैसेज को इग्नोर कर सकता था । मगर उसके दिल का एक कोना , कह रहा था कि उससे मिलने में क्या हर्ज है? शायद यह उनकी आखरी मुलाकात हो। हा ! हा ! मनीष हंसा। लेकिन यह मिलन आज हो जाए तो बेहतर है क्योंकि कल उसे अपने घर पटना जाना है। मम्मी ने बुलाया है।

मनीष चल दिया । अपने उसी पुराने मुहल्ले में जहां वह पहले रहता था । अंधेरा घिरने लगा था । रात का अंधकार अपने लिहाफ को गहरा फैला रहा था । लेकिन मनीष चला जा रहा था । उसके दिमाग में गौरी का गोरा हुस्न घूम रहा था । उसकी सिसकारी से भरी धीमी और मीठी मीठी सी कस मसाहट याद आ रही थी । मन में गौरी को एक बार फिर प्यार से सराबोर कर देने की शातिर ख्वाहिश जाग रही थी । “क्या हर्ज है इसमें , आखिर यह उनकी आखिरी भेंट है !! मनीष का भेजा वासना की आग में दहकने लगा ।

कि तभी अंधेरे में डूबे आम और जामुन के पेड़ों के इर्द गिर्द झाड़ियों के पास से एक आवाज आई 
…” मनीष ! इधर देखो इधर, मैं हूं !”

“अरे यह तो गौरी है !! मनीष उसकी तरफ भागा । परंतु वह वहां नहीं थी। “मनीष प्लीज इधर आ जाओ , मैं यहां हूं !! “ मनीष उधर की ओर भागा किंतु वह फिर गायब हो गई। मनीष को एक आशंका हुई कि हो न हो यह कोई प्रेत आत्मा है जो गौरी का रूप धर उसे तंग कर रही है। 

मनीष ने वहां से भागना उचित समझा । वह दौड़ पड़ा । तेज और तेज । रास्ते में उसके पैरों में चोट लगती रही । वह गिरता रहा । लेकिन पुन: उठ कर भागता रहा । हां , यही उसका पुरना मोहल्ला है। और वह रहा उसका पुराना मकान। जोगेंद्र बाबू का मकान । उसकी पूर्व प्रेमिका गौरी का मकान ।

लेकिन यहां कैसी भीड़ लगी है ? पुलिस की गाडियां दिख रही हैं । लोग खामोश खड़े हैं । कुछ लोग जो बातें कर रहे हैं वह आपस में धीमी धीमी आवाज में बातें कर रहे हैं । क्या हुआ है भाई साहब ? 

जोगेंद्र बाबू की बड़ी बेटी ने आत्म हत्या कर ली। पुलिस जांच कर रही है। “ बड़ी बेटी ?! यानी गौरी ? नहीं गौरी नहीं हो सकती । वह तो मुझे रास्ते में मिली थी । “

“ वह गर्भवती थी। शादी के पहले गर्भवती ? शर्म और लाज से बचने के लिए , उसे यही एक उपाय मिला ?! हे प्रभु ! “ यह एक और कोई बोल रहा था। लेकिन मनीष उसे नहीं देख रहा था। उसे चक्कर आ रहा था। ऐसा लग रहा था कि वह वहीं गश खा कर जमीन पर गिर जाएगा । 

तभी उसे किसी ने टोका । “ देखिए मनीष बाबू ! क्या अनर्थ हो गया जोगेंद्र बाबू के साथ ! “ यह वही प्यून था जो उसके पहले वाले ब्रांच में काम करता था ।मनीष के होश फाख्ता हो रहे थे । वह वहां से जल्द से जल्द भागना चाहता था। उसने उस बैंक के प्यून से रिक्वेस्ट की वह उसके लिए लिए एक ऑटो (Auto Service)का इंतजाम कर दे।

मनीष कुमार शर्मा को उस रात नींद नहीं आई । उस रात क्या पूरे दो हफ्ते तक नींद नहीं आई । उसे लगता की गौरी की आत्मा उसके आस पास भटक रही है। वह बीमार हो गया । उसने बैंक से छुट्टी ली और अपने घर पटना वापस लौट आया। पटना के आवास में उसके परिवार के बहुत लोग थे। उसका डर कुछ कम हुआ लेकिन गौरी की आत्मा उसे उसके सपनों में आती रही। उसकी कंडीशन बिलकुल पागलों जैसी होती जा रही थी 

लगभग एक महीने बाद मनीष की शादी हो गई। शादी के तुरंत बाद उसे बैंक ने वापस बहाल कर लिया। मनीष की पत्नी का नाम माधुरी है। माधुरी ने अपने प्यार से मनीष की जिंदगी बदल दी।


आज जब मैं मनीष कुमार शर्मा से मिला तो अपने बैंक के पटना ,गर्दनीबाग शाखा ,का मैनेजर हो गया है। “ गौरी की आत्मा फिर नहीं आती मनीष ?” मैने उससे पूछा था । उसने इनकार में सिर हिलाया और कहा “ शायद वह हार गई । या उसका पुनर जन्म हो गया !! “ 
हम इस बात पर मुस्कुरा रहे थे । चाय का ग्लास खाली हो चुका था। मैने उससे बिदा लिया । और घर लौट कर यह कहानी लिख दी ।


Writer: Satish Tiwari \ सतीश तिवारी 

























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