वेस्ट बंगाल का एक छोटा सा कस्बा है निहायत ही मुस्लिम बाहुल्य इलाका । इस कस्बे के ठीक कुछ दूर पर एक और छोटा सा कस्बा है जहां ज्यादातर बंगाली परिवार रहते हैं । इनमें से बहुत सारे परिवार पड़ोस के बांग्लादेश से भाग कर यहां बस गए है । मगर यह बहुत पुरानी बात है । इतनी पुरानी कि यहां के बाशिंदे इस बात को भूल चुके हैं और काफी घुलमिल कर रहते हैं।
इनके घुलमील कर रहने की वजह है आर्थिक तंगी और गरीबी । इन दोनों कस्बों को मिलाने वाली एक सड़क है। इस सड़क के किनारे एक छोटा सा बाजार है । इसी बाजार के सबसे अंतिम वाले छोर पर मनन की ताड़ी दुकान है। यह दुकान मनन के अब्बा ने खोली थी । जब वे बूढ़े होकर मर गए तो मनन ने यह दुकान चलानी शुरू की। ताड़ी की यह दुकान पहले खूब चलती थी । लेकिन मनन अब खुद बूढ़ा हो चला था।
हर रोज अल सुबह ताड़ी के पेड़ पर चढ़ना अब उसके बस की बात नहीं रही थी । बदकिस्मती से मनन की कोई औलाद नहीं थी । उसकी पहली वाली बीबी ने एक लड़की को जन्म दिया और संसार से चलती बनी। फिर एक दिन अचानक उसकी बेटी को तेज बुखार हुआ और वह भी दुनिया से रुखसत हो गई।
यार दोस्त ,सगे संबंधी उसे फिर से शादी करने और दुबारा घर बसाने की सलाह मशविरा देते रहे लेकिन मनन की हिम्मत नहीं हुई और दिल ही नहीं चाहा । उसने सोचा था की उसकी जिंदगी यूंही गुजर बसर हो जायेगी परंतु जिंदगी हर मोड़ पर उसके अकेलेपन को काटती थी ।
"काश मेरा एक लड़का होता तो ताड़ी की इस दुकान को संभाल लेता और मैं चैन से जीता ! " मनन के मन में यह ख्याल बार बार आने लगा था और उसे बेचैन करने लगा था ।
खैर , गर्मियों के शुरुआती दौर में मनन ने शादी कर ली। शादी क्या कर ली वह अपने लिए एक दुल्हन खरीद लाया । उसकी बीवी पास के बंगाली कस्बे की थी। और बला की खूबसूरत और जवान थी । उसके सांवले रंग पर तीखे तीखे नैन नक्श , बड़े बड़े लम्बे बाल , छरारा बदन और कमसिन उमर। मनन को जैसे खुदा ने बेस कीमती हीरा दे दिया था । मनन तो उसे बस देखता रहता और अपनी संपत्ति पर इतराता रहता।
मगर मनन की यह कहानी यहीं से मोड लेती है। उसकी नई नवेली बीबी जिसका नाम मौली था वह धीरे धीरे बदचलन होती गई। मनन उसकी कसमसाती जवानी की भूख और प्यास को शांत करने में सक्षम नहीं हो पाता तो क्या करती मौली ? मनन की गैर हाजरी में उसके प्रेम के किस्से आम से सरे आम होते जा रहे थे।
हद तो तब होने लगी जब मनन को जलाने के लिए मौली दूसरे मर्दों से हिलमिल कर बतियाने लगी थी। ऐसा नहीं था कि मनन को मौली के प्रेम प्रसंगों की भनक और जानकारी नहीं थी । परंतु वह खुद को बेहद बेबस और मजबूर महसूस करता । जब भी वह मौली को रोकता टोकता तो वह उससे ही झगड़ पड़ती।
इधर के दिनों में मौली का एक नया प्रेमी आया था । ट्रैक्टर ड्राइवर नईम। अक्सर दोपहर को नईम उसके दुकान पर आता। जम कर ताड़ी पीता और और सड़क किनारे बरगद के पेड़ के नीचे मौली की मुहब्बत में लीन हो जाता। और उधर मनन अपनी दुकान की झोपड़ी में लगी खाट पर पड़ा , गुस्से ,खीझ और अफसोस की आग में दहक रहा होता । उसे लगता कि अब खुदकुशी ही एक बेहतर विकल्प है ऐसी स्थिति से मुक्ति पाने के लिए ।
बहरहाल, अपने करीबी दोस्तों और सलाहकारों के कहने के बाद एक रात उनसे मौली को प्यार से समझाया कि वह अपनी नाजायज प्रेम की हरकतों से बाज आए। इससे गांव भर में उनकी बदनामी हो रही है। मौली कुछ नहीं बोली । चुपचाप आंसू बहाती रही ।
दूसरे दिन सुबह मनन जब ताड़ी उतारने के मकसद से ताड़ के ऊंचे पेड़ पर चढ़ रहा था । तो अचानक उसका दिल जोरों से धड़कने लगा। उसने नीचे झांक कर देखा तो मौली उसी नईम , ट्रैक्टर ड्राइवर की बांहों में लिपटी हुई थी । दोनों ऊपर उसकी ओर देख देख मुस्कुरा रहे थे और एक दूसरे को प्यार कर रहे थे।
मनन ताड़ के पेड़ के उस ऊंचाई पर चढ़ आया था जहां से जल्दी उतरना आसन नहीं था। वह कुछ पल ठहर नीचे उतरने की कोशिश करने लगा मगर इस कोशिश में अचानक उसका संतुलन बिगड़ा और वह नीचे गिर कर मर गया।
कथा लेखक : सतीश तिवारी
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